पहली बार//पहला प्यार

 

तो फ़िर आना तुम,
उन घनी रातों में चादर की तरह,

उन बिन मौसम बरसातों की गिरती बूँदों की तरह,

उन रूखे-से पलों के सन्नाटों की तरह|

हर हँसी तुम्हारी मुस्कानों से भरी है,

हर घड़ी तुम्हारी साँसों की महक से,

हर दिन तुम्हारे गम से पूरा|

तो चलते हैं कहीं दूर,

छोर देते हैं ये दुनिया|

तुम ही बन जाओ मेरा चाँद,

तुम ही बन जाओ मेरा अंधेरा,

तुम ही बन जाओ मेरा उजाला|

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4 thoughts on “पहली बार//पहला प्यार

  1. Good .nice one
    On 14 Dec 2016 00:39, “the kaleidoscope of affinity” wrote:

    > Paridhi posted: “तो फ़िर आना तुम, उन घनी रातों में चादर की तरह, उन बिन
    > मौसम बरसातों की गिरती बूँदों की तरह, उन रूखे-से पलों के सन्नाटों की तरह| हर
    > हँसी तुम्हारी मुस्कानों से भरी है, हर घड़ी तुम्हारी साँसों की महक से, हर
    > दिन तुम्हारे गम से पूरा| तो चलते हैं कहीं दूर”
    >

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